मैं किसको जिऊं
सब मेर अपने हैं
ये उदर ये मुख ,
ये दुःख ये सुख
मैं किसको जिऊं......
निशा तम को चाँद को संग लाने का वादा करता है,
या फिर दिवस में
सूर्य के सातवें अश्व की प्रतीक्षा करूं
मैं किसको जिऊं..............
अनुसन्धान बन कर किसे खोजूं?
जो पास है उसे क्यों ढूँढउ ?
म्रत्यु तो आंतिक थाती है
उसे निश दिवस क्यों भोगूँ ?
मैं किसको जिऊं..............
छद्म पिपासा का बन कर ,
जिसे अपनी प्यास का पता नही
या विषम उन्माद का हो कर ,
जिसे अपनी कयास का भान नही .
मैं किसको जिऊं..............
चोंच में मृत्युज अंश दबाये कौए को
जिसे मांश के दुसरे टुकड़े की तलाश है
सुखद,अति सुखद , ऐसी तृप्ति ?
तत्च्हन मेरे भीतर का गणित जागा
अरे द्वितीय हेतु कौए ने प्रथम को त्यागा , अभागा.
मैं किसको जिऊं..............
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